अष्टादश पुराणेषु व्यासस्य वचन द्वयम्  ||

परोपकाराय पुण्याय पापाय परपीडनम्  ||

 

img_6258भगवान् व्यास द्वारा रचित् अठारह पुराण का मुख्य सार सुभाषितकार ने यही बताया है की परोपकार से पुण्य और किसी को पीड़ा देने से पाप मिलता है ।

हमारे जीवन में हमें सुख सत्कर्मो से ही प्राप्त होता है । यही वास्तविकता को ध्यान में रख कर हम सदैव अन्न वस्त्र के दान के लिए तत्पर रहते है ।

संस्था समय समय पर अथवा किसी की व्यक्तिगत आवश्यकता अनुसार अन्न वस्त्र की व्यवस्था करने को कटिबद्ध है । 

इसके अतिरिक्त अन्न तथा वस्त्र का अभाग्रस्त लोगों में नियमित रुप से वितरण किया जाता है ।