विज्ञान गणित राजनीति कृषि नृत्य गायन वाद्य एवं जीतनी भी कलाए एवं वेद उपनिषद् पुराण तथा रामायण महाभारत जैसे इतिहास ग्रन्थ हमे धरोहर मे प्राप्त है उसका श्रेय संस्कृत भाषा को जाता है |

अर्वाचीन युग मे संस्कृत को सबसे उत्तम भाषा की मान्यता मिली है

आज तक संस्कृत भाषा मे अन्य भाषाओ कि भाँति बदलाव नहि आया, ये उसकी पूर्णता का प्रमाण है

संस्कृत के उच्चारण से दिव्य अनुभूति स्वयं ही होने लगती है

इस भाषा के अध्ययन से गीता उपनिषद् जैसे तत्वज्ञान के ग्रन्थ समझने एवं याद करने में सरलता होती है

दुर्भाग्यवश हम उस उन्नत धरोहर को भुलते जा रहे है | आज आवश्यकता है कि हम सभी अपनी इस संपदा का जतन करे |

इसी हेतु हमारा प्रयास है की संस्कृत भाषा के लिए कार्य करे और आधुनिक व्यवस्था द्वारा भी प्रचार करे ।

प्रचार पद्धति

१. भाषा के नियमित व्यक्तिगत वर्ग

२. इलेक्ट्रॉनिक माध्य्म द्वारा प्रचार एवं शिक्षा (Skype, Youtube इत्यादि )

३. सरल भाषा पुस्तक वितरण

The very sound of Sanskrit words gives a prestige and a power and a strength to the race. Sanskrit and prestige go together in India. As soon as you have that, none dares say anything against you. That is the one secret; take that up.
– Swami Vivekananda

Sanskrit has moulded the minds of our people to extent to which they themselves are not conscious. Sanskrit literature is national in one sense, but its purpose has been universal. That is why it commanded the attention of people who were not followers of a particular culture…
– Dr.Radhakrishnan

Our whole culture, literature and life would remain incomplete so long as our scholars, our thinkers and our educationists remain ignorant of Sanskrit.
– Dr.Rajendra Prasad

Sanskrit is the greatest language in the world.
– Max Muller

Sanskrit language, has been universally recognized by those competent to form a judgement, as the most perfect, the most prominent and wonderfully sufficient literary instruments developed by the human mind.
– Sri Aurobindo