अहमात्मा गुडाकेश सर्वभूताशयस्थित: |
अहमादिश्च मध्यं च भूतानामन्त एव च || (श्रीमद्भगवद्गीता – वीभूतियोग )

 

img-20160913-wa0006भगवान् श्रीकृष्ण ने वीभूतियोग मे कहाँ है कि मैं सब के हृदय में स्थित आत्मा हूँ । सभी जीवो का आदि, मध्य और अन्त मैं ही हूँ ।

सर्वत्र ब्रह्म भाव का उत्कृष्ट माध्यम ये भी है की मनुष्यो की भी यथा शक्ति सेवा की जायें । इसी लक्ष्य को ध्यान में रखकर संस्था द्वारा  निःशुल्क  स्वास्थ्य सम्बंधित शिविर का आयोजन किया जाता है ।

निःशुल्क  दवाइयां और चिकित्सकीय सलाह के लिए भी संपर्क कर सकते है ।