गावो भूतं च भव्यं च गाव:पुष्टि: सनातनि |

गावो लक्ष्म्यास्तथा मूलं गोषु दत्तं न नश्यति || [गवोपनिषद्]

 

“गाय भूत तथा भविष्य हैं । गाय ही सदा रहने वाली पुष्टि का कारण एवं लक्ष्मी की जड़ हैं  हैं । गौओं को कुछ दिया जाता है तो उसका पुण्य कदापि नष्ट नहीं होता । ”

सनातन धर्म में गाय को केवल प्राणि नहीं अपितु साक्षात देवता मना गया है  ।भगवान् राम और कृष्ण ने भी अपने अवतार काल में गाय को अत्याधिक महत्व दिया । श्री कृष्ण तो गो पालक बनके ही रहे ।

गो सेवा का प्रण ले कर हम गाय नहीं परंतु अपने पर उपकार करते हैं । गाय हमें पञ्च गव्य देकर हमारी आर्थिक  शारीरिक एवं मानसिक रक्षा करती है ।

गाय को नष्ट न होने देकर और पुष्ट कर के हम अपने समाज एवं राष्ट्र को ही पुष्ट करेंगे ।